आगामी पर्व — कार्तिक पूर्णिमा मेला • 24 नवंबर 2026 • शुकतीर्थ में गंगा स्नान
श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ
वर्तमान भागवत पीठाधीश्वर • भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम

पूज्य स्वामी ओमानन्द जी महाराज

पीठाधीश्वर • 2004 — वर्तमान

ब्रह्मलीन वीतराग स्वामी कल्याण देव जी महाराज के प्रमुख शिष्य एवं उत्तराधिकारी, जो 2004 से भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ में शिक्षा, सेवा एवं सनातन परम्परा की अखंड ज्योति को आगे बढ़ा रहे हैं।

54+ वर्ष

सेवा में समर्पित

2004

पीठाधीश्वर बने

22+ वर्ष

पीठाधीश्वर सेवाकाल

22

शिक्षण संस्थाओं की स्थापना

शुकतीर्थ, गंगा तट

1972 — शुकतीर्थ आगमन

गुरु स्वामी कल्याण देव जी से पहली भेंट

(कल्पनात्मक चित्रण)

✦ प्रारम्भिक जीवन ✦

सत्य की खोज से गुरु-दर्शन तक

पूज्य स्वामी ओमानन्द जी महाराज का जन्म 1947 में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल के एक किसान परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था से ही उनका मन आध्यात्म की ओर उन्मुख था। वैराग्य धारण कर सत्य की खोज में वे देवभूमि उत्तराखंड की ओर निकल पड़े, अनेक तीर्थों की यात्रा की तथा वेद, शास्त्र एवं धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया।

स्वामी कल्याण देव जी एवं स्वामी ओमानन्द जी

स्वामी ओमानन्द जी महाराज (बाएँ) अपने गुरु स्वामी कल्याण देव जी के साथ।

✦ गुरु से उत्तराधिकार तक ✦

एक विश्वस्त शिष्य, एक अखंड परम्परा

स्वामी ओमानन्द ब्रह्मचारी जी दीर्घकाल तक ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव जी महाराज के सान्निध्य में रहकर भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम की सेवा में समर्पित रहे। उनकी निष्ठा एवं सेवा-भावना को देखते हुए स्वामी कल्याण देव जी ने अपनी वसीयत में उन्हें आश्रम का एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित किया।

सन् 2004 में गुरु के ब्रह्मलीन होने के पश्चात स्वामी ओमानन्द जी ने भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ के पीठाधीश्वर का दायित्व सम्भाला। ट्रस्ट के समस्त न्यासियों को उनके निर्णयों का सम्मान करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था, जिससे परम्परा का सुचारु एवं निर्विघ्न हस्तांतरण सुनिश्चित हुआ।

“स्वामी ओमानन्द जी ने भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के विकास हेतु अथक परिश्रम किया है और वे ही मेरे एकमात्र उत्तराधिकारी हैं।”

स्वामी कल्याण देव जी की वसीयत से, जिसके आधार पर उन्होंने 2004 में पीठाधीश्वर का पद ग्रहण किया।

गुरु-शिष्य के सान्निध्य के क्षण

✦ सेवा-यात्रा ✦

पीठाधीश्वर के रूप में दो दशक

  1. 2004

    पीठाधीश्वर के रूप में उत्तराधिकार

    ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव जी महाराज ने अपनी वसीयत में स्वामी ओमानन्द ब्रह्मचारी जी को अपना एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित करते हुए श्री शुकदेव आश्रम की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सौंपी, तथा ट्रस्ट के समस्त न्यासियों को उनके निर्णयों का सम्मान करने का निर्देश दिया।

  2. 2004 – वर्तमान

    शिक्षा का विस्तार

    गुरु परम्परा को आगे बढ़ाते हुए निर्धन एवं सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के लिए लगभग 22 नई शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की, जिनमें श्री शुकदेव संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भी सम्मिलित है।

  3. पीठाधीश्वर कार्यकाल में

    मुख्यमंत्री से भेंट — शुकतीर्थ विकास परिषद

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से भेंट कर शुकतीर्थ विकास परिषद के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे तीर्थ के चहुंमुखी विकास को नई दिशा मिली।

  4. पीठाधीश्वर कार्यकाल में

    शुकतीर्थ साहित्य का बहुभाषी प्रकाशन

    शुकतीर्थ से संबंधित साहित्य को 10 विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित करवाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे इस पावन तीर्थ की महिमा देश-विदेश तक पहुँची।

  5. प्रतिवर्ष 14 जुलाई

    पुण्यतिथि एवं भागवत कथा

    स्वामी कल्याण देव जी की पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष सप्ताह-भर चलने वाली श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन प्रारम्भ किया, जिसमें देश-विदेश से संत, विद्वान एवं श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।

  6. जून 2024

    पर्यावरण संरक्षण अभियान

    विश्व पर्यावरण दिवस पर शुकतीर्थ में वृक्षारोपण कार्यक्रम का नेतृत्व कर पर्यावरण संतुलन के प्रति आश्रम की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।

“शुकदेव मुनि सम्पूर्ण मानव जाति के पथ प्रदर्शक हैं।”

— स्वामी ओमानन्द जी महाराज

✦ सामाजिक सेवा-कार्य ✦

गुरु परम्परा को नई दिशा

स्वामी ओमानन्द जी महाराज ने अपने गुरु की सेवा-परम्परा को आगे बढ़ाते हुए निर्धन एवं सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के लिए अनेक नई शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण एवं धार्मिक अनुष्ठानों की निरंतरता को भी समान महत्व दिया है।

शिक्षा

वंचित एवं ग्रामीण वर्गों के लिए नवीन शिक्षण संस्थाओं की स्थापना, संस्कृत शिक्षा एवं वैदिक संस्कारों का संरक्षण।

पर्यावरण

वृक्षारोपण अभियानों एवं पर्यावरण दिवस कार्यक्रमों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण को सेवा-कार्य का अभिन्न अंग बनाया।

धर्म एवं सत्संग

प्रतिवर्ष श्रीमद्भागवत कथा, गीता भवन में गीता प्रवचन एवं अक्षय वट पूजन की परम्परा को निरंतर जीवंत रखा।

✦ गणमान्य भेंट ✦

जिन गणमान्य व्यक्तियों से भेंट हुई

सेवा-यात्रा के दौरान स्वामी जी से मिलने आए संत, आचार्य एवं विशिष्ट अतिथिगण।

✦ मीडिया में, उनके ही शब्दों में ✦

समाचार-पत्रों की नज़र से

आश्रम के वार्षिक आयोजनों एवं सार्वजनिक सम्बोधनों पर प्रकाशित कुछ समाचार रिपोर्टें।

अमर उजाला8 जुलाई 2025

21वीं पुण्यतिथि के अवसर पर स्वामी ओमानन्द जी ने कहा कि स्वामी कल्याण देव जी ने संत परम्परा को पुनर्जीवित किया तथा हस्तिनापुर, कुरुक्षेत्र, पुष्कर एवं वैष्णो देवी सहित अनेक तीर्थों के जीर्णोद्धार का कार्य किया।

स्वामी कल्याण देव ने जीवित की संत परंपरा : ओमानंद

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अमर उजाला9 जुलाई 2026

22वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्ताहव्यापी भागवत कथा में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द जी ने कहा कि गुरुदेव की साधना ने शुकतीर्थ धाम को जाग्रत कर उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान एवं विश्व-कल्याण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया।

भागवत धरा पर संत विभूति कल्याण देव का तप अमर रहेगा : ब्रह्मचारी

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रॉयल बुलेटिन

श्री शुकदेव पीठ पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द जी ने महर्षि शुकदेव जी को सम्पूर्ण मानव जाति का पथ-प्रदर्शक बताया।

सम्पूर्ण मानव जाति के पथ प्रदर्शक है शुकदेव मुनि : स्वामी ओमानंद

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एक अखंड परम्परा की जीवंत धारा

परम पूज्य स्वामी ओमानन्द जी महाराज के नेतृत्व में भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ आज भी शिक्षा, सेवा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु अपने जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याण देव जी महाराज के स्वप्न को साकार कर रहा है।