
मंदिर, संस्थाएं एवं वार्षिक मेले
सिद्ध भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के प्रमुख मंदिरों, शिक्षण-सेवा संस्थाओं एवं वर्ष-भर लगने वाले पावन मेलों का विस्तृत परिचय।
आश्रम के प्रमुख मंदिर
प्रत्येक मंदिर पर टैप/क्लिक करें और उसका पूर्ण इतिहास पढ़ें।

श्री शुकदेव मंदिर
आश्रम का मुख्य मंदिर
भगवती शाकुम्भरी मंदिर
सिंहवाहिनी दुर्गा माँ का मंदिर
भगवान शंकर का मंदिर
पंचायतन शिव-दर्शन
हनुमान मंदिर
वटवृक्ष के नीचे
गीता भवन
व्यासगद्दी एवं भागवत-सप्ताह स्थल

यज्ञशाला
दैनिक यज्ञ एवं पूर्णाहुति स्थल
अक्षय वट वृक्ष
5000+ वर्ष प्राचीन अक्षय वट का विस्तृत विवरण शुकतीर्थ पेज पर देखें।
विस्तार से जानेंशिक्षा एवं संस्कार के केंद्र
संस्कृत विद्यालय
देश के विभिन्न प्रांतों में पूज्य स्वामी जी द्वारा स्थापित हजारों शिक्षा-संस्थाओं की भांति, इस पावन तीर्थ पर भी प्राचीन संस्कृति के संरक्षण हेतु एक संस्कृत विद्यालय स्थापित किया गया।
पुस्तकालय
विद्यालय का अपना पुस्तकालय है जिसमें पाठ्य एवं साहित्यिक ग्रंथों का समृद्ध संग्रह है। इसका उद्घाटन 15 मई 1961 को हुआ।
छात्रावास
विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के आवास हेतु छात्रावास भवन उपलब्ध है।
श्रीमद् भागवत भवन
यहाँ कथा-श्रवण एवं भागवत कथा-आयोजनों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए कई भागवत भवनों का निर्माण कराया गया है।
जन-सेवा के केंद्र
शास्त्री धर्मार्थ आयुर्वेद औषधालय
आश्रम में निःशुल्क आयुर्वेदिक धर्मार्थ औषधालय एवं चिकित्सालय है, जहाँ योग्य व अनुभवी चिकित्सकों द्वारा दूर-दूर के ग्रामीण अंचलों से आने वाले गरीब, किसान, मजदूर व हर वर्ग के रोगियों का निःशुल्क उपचार किया जाता है।
गोशाला
गौ-सेवा हेतु बनी गोशाला का विस्तारीकरण तत्कालीन मुख्यमंत्री उ0प्र0 श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा 14 जुलाई 2019 को किया गया।
कृषि वाटिका एवं ट्यूबवेल
आश्रम की कृषि-वाटिका में फल-सब्जियों की खेती होती है। पेयजल हेतु ट्यूबवेल की व्यवस्था में पं0 कमलापति त्रिपाठी जी के सहयोग का उल्लेख मिलता है।
विशेष आयोजन
स्वामी कल्याण देव हेलिपैड प्रांगण।
वर्ष-भर के पावन अवसर
कार्तिक पूर्णिमा गंगास्नान मेला
कार्तिक पूर्णिमा (लगभग एक सप्ताह)
पूज्य स्वामी जी महाराज के प्रताप से इस तीर्थ पर गंगोत्पत्ति के पुण्यपर्व पर आरम्भ हुआ यह सबसे बड़ा वार्षिक मेला है। प्रारम्भ में लाला इन्द्रप्रकाश, तुलाराम, जयप्रकाश एवं जगतप्रकाश जी इसके संयोजक थे; बाद में प्रबंध जिला परिषद को सौंपा गया और वर्तमान में जिला पंचायत मुजफ्फरनगर इसका प्रबंधन करती है। दूर-दूर से प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु स्नान हेतु पधारते हैं।
गंगा दशहरा
गंगा दशहरा के अवसर पर लगने वाला एक-दिवसीय स्नान-मेला।
बैसाखी
बैसाखी के पर्व पर लगने वाला एक-दिवसीय मेला।
शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला एक-दिवसीय मेला।
पितृ विसर्जनी अमावस्या
पितृ विसर्जनी अमावस्या पर लगने वाला एक-दिवसीय स्नान-मेला।
श्रीमद् भागवत सप्ताह
अक्षय वट के नीचे प्रारम्भ हुई यह भागवत कथा-परम्परा आज भी निरंतर चलती है — देश-विदेश के विद्वान कथावाचक व भागवताचार्य यहाँ कथा हेतु पधारते हैं। पंडित पुरुषोत्तमलाल जी (जयपुर) ने लगातार 42 वर्षों तक यहाँ भागवत कथा सुनाई।
कुछ मेलों की सटीक पंचांग-तिथियाँ आश्रम की पुस्तिका से अभी पुष्टि की जानी बाकी हैं।