जहाँ समय ठहर जाता है
और श्रद्धा का इतिहास जीवंत हो उठता है।
पाँच हजार वर्षों की यह यात्रा केवल इतिहास नहीं, बल्कि श्रद्धा, ज्ञान और सनातन संस्कृति का अमर प्रवाह है।

अक्षय वट
5000 वर्ष पूर्व
अक्षय वट की छाया में प्रारंभ हुई मोक्षदायिनी भागवत कथा
यही वह पावन भूमि है, जहाँ भगवान स्वयं श्री वेदव्यास जी के पुत्र महर्षि शुकदेव जी महाराज के रूप में प्रकट हुए और राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत महापुराण का दिव्य उपदेश देकर उन्हें मोक्ष प्रदान किया। यही वह पवित्र धरा है, जहाँ से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित हुई।

परीक्षित संवाद
अमर संवाद
राजा परीक्षित एवं श्री शुकदेव जी
राजा परीक्षित और श्री शुकदेव जी के मध्य हुआ सात दिवसीय दिव्य संवाद सम्पूर्ण मानवता के लिए श्रीमद्भागवत का अमूल्य उपहार बन गया।

शुकतीर्थ
आज का शुकतीर्थ
आज भी जीवंत है वही दिव्य परम्परा
आज भी लाखों श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा श्रवण, गौ सेवा, पुण्य स्नान और आध्यात्मिक साधना के लिए इस दिव्य भूमि पर आते हैं।

अक्षय वट
जहाँ से दिव्य कथा का प्रारम्भ हुआ
यही वह पावन भूमि है, जहाँ भगवान स्वयं श्री वेदव्यास जी के पुत्र महर्षि शुकदेव जी महाराज के रूप में प्रकट हुए और राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत महापुराण का दिव्य उपदेश देकर उन्हें मोक्ष प्रदान किया। यही वह पवित्र धरा है, जहाँ से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित हुई।









































