
आस्था एवं तपस्या की अखंड यात्रा
मान्यता है कि यही वह पावन भूमि है जहाँ महर्षि शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। इसी पवित्र स्मृति को जीवंत रखते हुए परम पूज्य वीतराग स्वामी कल्याण देव जी महाराज ने इसका जीर्णोद्धार किया और मूलभूत सुविधाएँ सम्पन्न कराईं।
आज यहाँ धर्म, अध्यात्म, धर्म-प्रचार, पर्यावरण और मानव सेवा के विशाल प्रकल्प अनवरत चलते रहते हैं।





