आगामी पर्व — कार्तिक पूर्णिमा मेला • 24 नवंबर 2026 • शुकतीर्थ में गंगा स्नान
श्री शुकदेव आश्रम परिसर
ऐतिहासिक महाभारतकालीन भागवत पीठ

श्री शुकदेव आश्रम

श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याणदेव सेवा ट्रस्ट

5000+

वर्ष परम्परा

2

गुरु परम्परा

250+

सेवा संस्थान

1

अक्षय वटवृक्ष

✦ परिचय ✦

पावन साधना एवं भागवत ज्ञान की अमर स्थली

शुकतीर्थ स्थित सिद्ध भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम एक ऐतिहासिक महाभारतकालीन श्रीमद्भागवत पीठ है — मान्यता है कि यहीं महर्षि शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण कराया था, और तभी से भागवत ज्ञान की यह धारा सदियों से अखंड रूप से प्रवाहित हो रही है। श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याणदेव सेवा ट्रस्ट के संचालन में यह पवित्र पौराणिक स्थल आज भी सेवा, साधना और संस्कार के उच्च मूल्यों को जीवंत रखे हुए है।

आश्रम की परम्परा
✦ हमारी कहानी ✦

आस्था एवं तपस्या की अखंड यात्रा

मान्यता है कि यही वह पावन भूमि है जहाँ महर्षि शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। इसी पवित्र स्मृति को जीवंत रखते हुए परम पूज्य वीतराग स्वामी कल्याण देव जी महाराज ने इसका जीर्णोद्धार किया और मूलभूत सुविधाएँ सम्पन्न कराईं।

आज यहाँ धर्म, अध्यात्म, धर्म-प्रचार, पर्यावरण और मानव सेवा के विशाल प्रकल्प अनवरत चलते रहते हैं।

जीर्णोद्धारक • पद्म भूषण सम्मानित

स्वामी कल्याण देव जी महाराज

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✦ वर्तमान भागवत पीठाधीश्वर ✦
स्वामी ओमानन्द जी महाराज

परम पूज्य स्वामी ओमानन्द जी महाराज

पीठाधीश्वर • सिद्ध भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम • 2004 – वर्तमान

“गुरुदेव की साधना ने शुकतीर्थ धाम को जाग्रत कर उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान एवं विश्व-कल्याण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया।”

✦ गुरु परंपरा ✦

अखंड आध्यात्मिक वंशावली

श्री शुकदेव जी

श्री शुकदेव जी

आदि कथाव्यास

गुरु परम्परा

अखंड ज्ञान-धारा

स्वामी कल्याण देव जी

स्वामी कल्याण देव जी

जीर्णोद्धारक

स्वामी ओमानन्द जी

स्वामी ओमानन्द जी

वर्तमान भागवत पीठाधीश्वर

✦ हमारा दर्शन ✦

सेवा • साधना • संस्कार

आश्रम की आधारशिला इन तीन मूल सिद्धांतों पर टिकी है। हमारा अटूट विश्वास है कि भक्ति सेवा से सिद्ध होती है और जीवन संस्कारों से महान बनता है।

सेवा

निःस्वार्थ भाव से गौसेवा, अन्नक्षेत्र और समाज के वंचित वर्गों की सेवा।

साधना

नियमित भागवत कथाओं एवं सत्संग के आयोजन, जप, संकीर्तन और ध्यान के माध्यम से आत्म-कल्याण।

संस्कार

सनातन संस्कृति, वैदिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों का भावी पीढ़ी में सिंचन।

प्राचीन वटवृक्ष
✦ दिव्य विरासत ✦

5000+ वर्षों का साक्षी — महाभारतकालीन सिद्ध अक्षय वटवृक्ष

श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, यह पावन वटवृक्ष उस दिव्य क्षण का प्रत्यक्ष साक्षी है जब महर्षि शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को मोक्षदायिनी भागवत कथा सुनाई थी।

यह विशाल वटवृक्ष आज भी हरा-भरा है और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को असीम शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना की अनुभूति कराता है।

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✦ मुख्य आकर्षण ✦

आश्रम की अलौकिक प्रसिद्धि के कारण

01

भागवत कथा की जन्मस्थली

मान्यतानुसार यहीं महर्षि शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी।

02

अक्षय वटवृक्ष

5000 वर्ष प्राचीन वटवृक्ष जो द्वापर युग का साक्षी माना जाता है।

03

अखंड कथा अनुष्ठान

वर्षभर आयोजित होने वाले भव्य श्रीमद्भागवत कथा एवं सत्संग महोत्सव।

04

गौशाला एवं गौसेवा

गौवंश की समर्पित भाव से सेवा एवं संरक्षण।

05

नित्य अन्नक्षेत्र

प्रतिदिन दर्शनार्थियों एवं साधुओं के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसाद।

06

अविच्छिन्न गुरु परंपरा

महर्षि शुकदेव से लेकर वर्तमान पीठाधीश्वर तक निरंतर ज्ञान-धारा।

भागवत कथा आयोजन

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ, आश्रम प्रांगण

✦ धार्मिक आयोजन ✦

भागवत कथा एवं धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र

भागवत की मूल उद्गम स्थली होने के कारण देश-विदेश के विद्वान एवं भागवताचार्य यहाँ पधारकर कथा वाचन को परम सौभाग्य मानते हैं।

वर्षभर यहाँ श्रीमद्भागवत सप्ताह एवं विभिन्न धार्मिक-आध्यात्मिक महोत्सव आयोजित होते रहते हैं — जिनमें वीतराग स्वामी कल्याण देव जी की पुण्यतिथि (14 जुलाई) पर आयोजित होने वाली सप्ताहव्यापी भागवत कथा प्रमुख है।

श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याणदेव सेवा ट्रस्ट — पंजीकृत धार्मिक एवं चैरिटेबल ट्रस्ट

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शुकतीर्थ (मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश) में स्थित आश्रम में आपका हार्दिक स्वागत है।